Thursday, 29 August 2019

सरस्वती वंदना

 

 

 

 



हे हंसवाहिनी सुन लो तुम,
मेरे मन की बस एक पुकार,
हर अबला को सबला करना,
देकर तुम अपना वरद हाँथ।

कर बांध प्रार्थना करती हूँ,
शिक्षा का मार्ग प्रशश्त करो,
ये शिक्षा नहीं किताबी हो,
अनुभव का मार्ग प्रदत्त करो,
शारदा भवानी सुन लो तुम,
मन आँगन में नित वास करो,
सद्भाव हृदय में रहे सदा,
तुम जग को भाव प्रधान करो,
हे ममतामयी जननी जग में,
तुमको ही करना है प्रकाश,

हे हंसवाहिनी सुन लो तुम,
मेरे मन की बस एक पुकार।

नवयुवकों में नवप्राण भरो,
गाण्डीवों में संधान भरो,
सदमार्ग प्रदर्शित हो उनको,
संकल्पों का वरदान भरो,
त्यागें कलुषित कर्मों को वो,
और राम कृष्ण से हो जाये,
बन श्रवण उठे दायित्व सदा,
ध्रुव बन आकाश चमक जाए,
वे स्वयं बढ़े सच्चे पथ पर,
मित्रों का मार्ग प्रशस्त करें,
जग भर के त्राण हरें सारे,
हृदयों को वो आश्वस्त करें,
संभ्रांत बने ये जग सारा,
फैले अतुलित अनुपम प्रकाश,
सब क्षोभ कलुषता हर जाए,
बस प्रेम भरा हो ये जहान,
सब ज्ञान गंग जल में डूबें,
सबका नित हो निर्मल विकास,

हे हंसवाहिनी सुन लो तुम,
मेरे मन की बस एक पुकार।

साहित्य सदा पोषित हो और,
साहित्यकार अच्छा लिखें,
रचनाओं में सार्थकता हो,
जो भी लिखें सच्चा लिखें,
लेखनी वरण करने वाले,
भी सैन्य योद्धा हो जाएं,
हर बात उजागर जो कर दे,
उस अंशुमान से हो जाएं,
रस छंद युक्त हो रचनाएं,
लेखनी लगे तलवार धार,

हे हंसवाहिनी सुन लो तुम,
मेरे मन की बस एक पुकार।

वेदों से धरती सिंचित हो,
हर ओर ऋचाएं गाती हों,
उपनिषदों की वाणी भी फिर,
जन मानस को सरसाती हो,
रामायण घर घर में गूंजे,
हर घर एक तीरथ धाम बने,
गीता की ज्ञान भरी वाणी,
से कर्मप्रधान समाज बने,
करबद्ध निमंत्रण है तुमको,
बल बुद्धि शक्ति प्रदान करो,
मन को मंदिर सा कर माता,
तुम मन मंदिर में वास करो,
सद्बुद्धि , सदा नवयुवकों में,
विकसति हो कर , कर दे प्रकाश,

हे हंसवाहिनी सुन लो तुम,
मेरे मन की बस एक पुकार।

हे सरस्वती सुन लो मेरे मन के सारे उद्गार आज,
हे पद्माक्षी हे शिवानुजा कर दो मेरा उद्धार आज,
हे मातभवानी महाभुजा , मेरी भुजाओं में बल भर दो,
हे दिव्यांगी क्षणभंगुर काया को मेरी परहित कर दो,
हे सुरवंदिता वैष्णवी तुम आ करके कंठ विराज रहो,
हे चंद्रवदन चन्द्रिका,चन्द्रलेखाविभूषिता साथ रहो,
हे शुभदा सौम्या वाराही सौम्यता मुझे दे दो अपनी,
हे रमा महाविद्या शारद गूढ़ता मुझे दे दो अपनी,
हे हंसवाहिनी जगती तुम वरदायनी हो वरदान तो दो,
हे चंद्रकांति भुवनेश्वरी तुम इस धरती पर सम्मान तो दो,
हे सर्वप्रिया विद्यारूपा, विद्या का मुझको दान करो,
हे त्रिगुणा स्वरात्मिका देवी मेरा भी अब कल्याण करो,
हे शत्रुनाशिनी मित्रदायनी कोई शत्रु न हो मेरा,
हे प्रेम प्रदायिनी माता मन हो मेरा प्रेम भरा डेरा,
हे बुद्धिदात्री तुम हमको वर दो प्रबुद्ध हम हो जाएं,
हे ब्रह्नसुता तेरे वर से सद्बुद्धि युक्त हो तर जाएं,
हे सुधामूर्ति माँ मन में मेरे सबके हित की अभिलाषा हो,
हे विमला विश्वा वाराही, मन तेरी भक्ति का प्यासा हो,
हे तीव्रा तीव्र बनूँ मैं भी, हे कांता कांति प्रदान करो,
हे परा कामरूपा मालिनी, शीतलता शांति प्रदान करो,
हे जगती हंसवाहिनी तुम इस धरती से अज्ञान हरो,
हे बुद्धिदात्री वागेश्वरी जग भर को बुद्धि प्रदान करो,
हे श्वेतानन हे नीलभुजा हे कामप्रदा हे निरञ्जना,
हे सर्वदेवस्तुता तुम्हारा वंदन शत शत महाबला,
हे चित्रम्बरा त्रिकालज्ञा जग भर के त्राण समाप्त करो,
हे वसुधा महाबला भामा तुम मनु हृदयों में व्याप्त रहो।
हे वसुधा महाबला भामा तुम मनु हृदयों में व्याप्त रहो।
हे वसुधा महाबला भामा तुम मनु हृदयों में व्याप्त रहो।



स्वधा रवींद्र " उत्कर्षिता"